बुधवार, 9 जुलाई 2008

सेक्स वेबसाइट का अर्धसत्य को प्रस्ताव.......



आज एक बार फिर से शिद्दत से एहसास हुआ था कि मैं बाकी सामान्य लोगों से अलग हूं क्योंकि मेरे बड़े भाई साहब डा.रूपेश श्रीवास्तव ने जिस तरह मुझे बताया कि उन्हें क्या और किससे प्रस्ताव आया... हमेशा की तरह से हम भाई-बहन मिले तो मैंने देखा कि भाई कुछ उदास से महसूस हो रहे हैं लेकिन अपनी उदासी को मुझसे छिपाने की नाकामयाब कोशिश कर रहे हैं। जब मैंने बहुत पूंछा तो उन्होंने बताया कि उन्हें किसी सेक्स वेबसाइट चलाने वाले ने फोन किया था कि क्या आप अर्धसत्य को उस वेबसाइट से जोड़ना चाहेंगे? हम लोग गे-लेस्बियन सेक्शन के साथ में एक नया सेक्शन हिजड़ों के लिये शुरू करने जा रहे हैं. हमारी व्यापारिक नीति व शर्तें ये...ये और वो ...वो हैं। यह जान कर थोड़ा सा पल भर को तो मुझे भी दुःख हुआ पर ये सोच कर कि इंटरनेट पर तो इस विषय की भरमार है तो वो बस एक व्यवसायी था जिसने हमें भी अपने जैसा समझा होगा और अपनी नीति बता दी, इस पर सहजता से उसे मना कर देना चाहिये बस लेकिन हम दोनो तो क्षुब्ध हो गये। शायद अभी हम दोनो को इन कटुताओं को झेलने के लिये और अधिक मजबूत होना पड़ेगा। हम लोगों ने इस विषय को चाय की चुस्की में ग़र्क करके जो कष्ट हुआ उसे निगल लिया और फिर चल पड़े हैं अपने रास्ते पर.......... ये सोच कर कि इस तरह के लोगों के अलावा ऐसे भी लोग तो हैं जो मुझे प्रेम करते हैं ,सम्मान देते हैं,आदर से दीदी कह कर पुकारते हैं। भाई ने खुद मुझे संबल दिया है किन्तु शायद मुझे भरमाने के लिये चिंतित दिखाते हैं खुद को कि वे भी साधारण इंसान हैं।

2 टिप्‍पणियां:

रजनीश के झा (Rajneesh K Jha) ने कहा…

दीदी,
चरण वंदन.
डॉक्टर साब चिंतित हों ये कुछ अजीब लगता है, मगर आप कह रहीं हैं तो सत्य ही होगा ये मैं जानता हूँ. विचार के जिस भवंर की लोग कल्पना करते हैं उसके ज्वार-भाटा यानी की हमारी दीदी और रुपेश.मगर शांति का अथाह समंदर समेटे हुए. आप विश्वास करें मगर इस पोस्ट को पढ़ कर मैं तनिक भी विचलित नही हूँ, हाँ इस समाज के एक एक परत और उस से उतरती सफेदी की चादर, वाह रे उपरवाले तेरी माया.
वैसे इन से ज्यादा चिंतित होना भी नही है क्यूंकि दीदी अभी हमें बहूत लड़ाई लड़नी है, सो इस घटना क्रम को हमारी लड़ाई का एक हिस्सा मान लो बस.
आपका छोटा भाई
रजनीश के झा

rajaraj ने कहा…

mushkilon ke samudri rupi thapedon ko sahas se par kar jana yahi to hai jindagi

 

© 2009 Fresh Template. Powered by भड़ास.

आयुषवेद by डॉ.रूपेश श्रीवास्तव