मंगलवार, 30 दिसंबर 2008

ज्योतिष शास्त्र ने भी लैंगिक विकलांगों को नकार दिया है

कल मैं ने देखा कि भाई डा.रूपेश कम्प्यूटर पर किसी बच्चे की कुंडली बना कर कुछ देख रहे थे। भला कौन ऐसा है जो भविष्य न जानना चाहता होगा तो मैंने भी उस कुंडली नामक साफ़्टवेयर को समझने का प्रयास करा, जब भाई मरीजो की दवाओं में जुट गये लेकिन मैं तो हतप्रभ रह गयी कि ज्योतिष शास्त्र मेरे जैसे बदनसीबों के लिए है ही नहीं क्योंकि उसमें जातक के जन्म समय, स्थान आदि के विवरण के साथ मात्र लिंग के विवरण में पुरुष/स्त्री ही है। मैंने स्वयं को दो बार इसे आजमाया एक बार पुरुष लिख कर और दूसरी बार स्त्री लिख कर और पाया कि ऐसा करने पर मात्र लिंग का अंतर होने से जातक के फलादेश में अंतर है, भविष्य में अंतर है। अब मैं सोच रहीं हूं कि ये वही ज्योतिष शास्त्र है जिसके बारे में तमाम विद्वान इसकी गहाराई , सत्यता और प्रामाणिकता के लिये बह्स दर बह्स करे जाते हैं लेकिन यह तो मात्र लैंगिक अंतर की गाढ़ी सी लकीर ही देख कर भ्रमित हो जा रहा है। मेरा उन तमाम हिंदी ब्लागरों से अनुरोध है कि इस विषय पर समुचित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का साहसपूर्ण शोध करें न कि चुप्पी साध जाएं वरना मेरे लिए ज्योतिष शास्त्र और पब्लिक टायलेट में कोई अंतर न रह जाएगा क्योंकि वहां भी हमारे लिये ऐसा ही संकट और भ्रम है।

5 टिप्‍पणियां:

पा.ना. सुब्रमणियन ने कहा…

जहाँ तक हमारी जानकारी है, कुंडली को देख कर यह बताना संभव नहीं है कि वह लड़के का है या लड़की का. कुंडली में उस व्यक्ति विशेष के लिए "जातक" शब्द का ही प्रयोग होता है. हमने इस कुंडली वाले सॉफ्टवेर का ना तो प्रयोग किया है ना ही देखा है. यह तो सॉफ्टवेर बनाने वाले ,की ग़लती है ना की ज्योतिष् शास्त्र की. मालूम ज़रूर करेंगे. आप सब को नव वर्ष मंगलमय हो.

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

आदरणीय सुब्रमणियन जी,कुंडली बनाते समय क्या यह अनिवार्य नहीं होता कि उसमें जातक का लिंग लिखा जाए कि जातक स्त्री है अथवा पुरुष?कुंडली बनने के बाद की बात नहीं ये बात प्रारम्भ की है जरा इस बात को बताएं क्योंकि मेरे पास जो कुंडली नामक साफ़्टवेयर है उसमें सारी सूचनाओं के साथ लिंग लिखे बगैर वह कार्य ही नहीं करता कि कुंडली बना सके

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" ने कहा…

रूपेश जी,वास्तव में इस प्रकार की समस्या के लिए ज्योतिष शास्त्र को दोष देना उचित नहीं है.इसमें दोष है तो केवलमात्र इन सोफ्टवेयर्स का.
ज्योतिष के मुख्यत: दो विभाग हैं, एक है गणित ओर दूसरा फलित.आज मार्कीट में जितने भी ज्योतिष के साफ्ट्वेयर्स उपलब्ध हैं उनकी उपयोगिता केवल इसके गणित के लिए ही की जाती है ना कि फलित हेतु.ओर गणित हेतु आप चाहे पुरूष लिखें अथवा स्त्री जन्मपत्रिका एक जैसी ही होगी.
अब अगर आप कम्पयूटर निर्मित जन्मकुन्डली के अन्तिम पृ्ष्ठों मे लिखे हुए के आधार पर भविष्य जानने के इच्छुक हैं तो आपको भ्रम का शिकार होना पड जाएगा.,क्योंकि उसमे वही गिनी चुनी दो-चार बातें घुमावदार तरीके से प्रत्येक के लिए एक समान लिखी गई होती हैं.
अगर आप भविष्य जानना चाहते हैं तो स्त्री या पुरूष चाहे जो लिख कर उसका प्रिन्ट निकालें ओर किसी विद्वान ज्योतिषी के पास जाऎँ.
कम्पयूटर तो अभी कुछ ही समय से प्रचलन मे आया है, अगर आप हस्तनिर्मित जन्मपत्रिका देखें तो उसमे कहीं भी स्त्री/पुरूष नहीं लिखा जाता. केवल अमुक व्यक्ति का पुत्र अथवा पुत्री लिखा जाता है.अब अगर कोई बालक लैंगिक विकलांग के रूप मे जन्म लेता है तो भी वो किसी का पुत्र अथवा पुत्री ही होगा.
एक बात ओर अगर कोई विद्वान ज्योतिषी है तो पत्रिका देखकर तुरन्त बता देगा कि अमुक जातक स्त्री है, पुरूष है या कि लैंगिक विकलांग है.
किन्तु पाखंड ओर आडंबर के इस युग मे ऎसे विद्वान मिलने भी दुर्लभ हैं.

Shastri ने कहा…

चिट्ठाकार एवं टिप्पणीकारों के माध्यम से विषय के विभिन्न पहुलुओं के बारे में जान कर लगा कि समस्या का हल निकाला जा सकता है.

सस्नेह -- शास्त्री

-- बूंद बूंद से घट भरे. आज आपकी एक छोटी सी टिप्पणी, एक छोटा सा प्रोत्साहन, कल हिन्दीजगत को एक बडा सागर बना सकता है. आईये, आज कम से कम दस चिट्ठों पर टिप्पणी देकर उनको प्रोत्साहित करें!!

सिद्धार्थ जोशी ने कहा…

मनीषा जी नमस्‍कार
आपकी समस्‍या वास्‍तव में गंभीर है लेकिन यहां हर विधा को कठघरे में खड़ा नहीं किया जा सकता। सुब्रमणियन साहब ठीक कह रहे हैं यह ज्‍योतिष की नहीं सॉफ्टवेयर की समस्‍या है। वैसे लैंगिक रूप से विकलांग होने के कुछ कारणों के बारे में कुछ फलित की पुस्‍तकों में दिया गया है। लैंगिक विकलांगता में केवल लिंग या योनि की अनुपस्थिति नहीं बल्कि लैंगिक अंगों की क्रियाशीलता में कमी का क्रिया की अनुपस्थिति भी आती है।
- कुण्‍डली बनाते वक्‍त लिंग का महत्‍व नहीं है। यह ठोस जानकारी है।
- बिना लिंग स्‍पष्‍ट किए कुण्‍डली बना दी जाए तो पता भी नहीं चलेगा कि यह पुरुष की कुण्‍डली है या स्‍त्री की
- अगर किसी को पता भी चलता हो तो वह यह भी बता सकेगा कि जुड़वां बच्‍चों में एक संतान पुरुष हो दूसरी स्‍त्री तो कैसे पता करेंगे
- कुत्‍ते और चींटी का जन्‍म समय लेकर उनकी कुण्‍डली बना दी जाए तो उसे मनुष्‍य से कैसे अलग करेंगे
इस तरह मैं कह सकता हूं कि इस शास्‍त्र की सीमाओं से बाहर आकर इसके बारे में कुछ भी कहा जाए तो वह झूठ होगा।

इति...

 

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