बुधवार, 17 दिसंबर 2008

हिंदी ब्लागरों में मनीषा नारायण ने कोहराम मचा रखा है

दीदी का लिखना बड़ा ही कड़ा रहा है हमेशा से जैसा कि मैं जानता हूं। इन बातों के पीछे कि वे इतनी प्रेम से भरी होने के बाद भी अक्सर नाराज क्यों हो जाती हैं उसका कारण उनका अतीत रहा है। जो लोग उनसे अपेक्षा करते हैं कि मनीषा! तुमने हिंदी सीख लिया अब ब्लागिंग करती हो तो अपने सारे अतीत को भूल जाओ तत्काल जिससे कि तुम कभी व्यथित रही हो। जिंदगी की रेलगाड़ी में भी सीट पर जगह बनाने के लिये धक्का-मुक्की करनी पड़ती है इन्हें सहज ही कुछ नहीं मिला कभी भी। हिंदी ब्लागरों के तो नाक-भौं सिकुड़ गये जब पता चला कि एक "हिजड़ा" तालियां बजाना छोड़ कर उन शरीफों के संग सायबर जगत में ब्लागिंग करेगा। बहुत तिरस्कार सहना पड़ा इस आभासी दुनिया में भी ,एक ब्लाग है "भड़ास" जो कि काफ़ी कुख्यात है अपनी भाषा के कारण लेकिन वह मंच अश्लील हरगिज नहीं है। उस मंच पर मैं दीदी को ले गया सद्स्यता दी उन्होंने एक उंगली से किसी तरह लिखना शुरू करा। वहां आरोप लगाया तमाम नामचीन ब्लागरों ने खुल कर कि प्रमाण दिया जाए कि मनीषा नारायण का अस्तित्त्व है भी या काल्पनिक हैं फिर हैं तो लैंगिक विकलांग हैं या नहीं.........। एक बार फिर जब वणिक सोच ने भड़ास पर कब्जा जमा लिया तो अचानक वहां से मनीषा दीदी की सदस्यता को समाप्त कर दिया गया। इसे कहते हैं उसे हाशिये से भी बेदखल कर दो जो अब तक हाशिये पर था और ये शर्त रख दो कि बिलकुल भी आवाज न करे अगर गाली दी या नाराजगी व्यक्त करी तो गंदे मान लिये जाओगे और कहा जाएगा कि यही तुम्हारी औकात है वगैरह वगैरह...।
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अब दोबारा इंतजार है उस घेराबंदी का जब तमाम ब्लागिंग गिरोह एग्रीगेटर्स पर भी हमारे जैसे लोगों को प्रतिबंधित करा दें। हम अभी से मानसिक तौर पर तैयार हैं पर किसी के आगे गिड़गिड़ाएंगे नहीं।

2 टिप्‍पणियां:

बेनामी ने कहा…

आप जिस कुख्यात भड़ास ब्लाग की बात लिख रहे हैं वो कुछ अलग है और आपने जो लिंक दे रखे हैं वो कुछ अलग से है ये क्या चक्कर है समझ में ही नहीं आया। क्या ये भड़ास का एक और एडीशन है या अलग मामला है?

Shastri ने कहा…

मानव समाज में जिस व्यक्ति ने भी दूसरों को रास्ता दिखाया उसे हमेशा समाज से अलग कर दिया जाता है. इस बात को समझ कर, बिना हिम्मत हारे, आगे बढती रहें!!

सस्नेह -- शास्त्री

 

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