शुक्रवार, 14 मार्च 2008

मुझ पर कहानी लिखना चाहते हैं ,दिल से शुक्रिया...

आदर के योग्य हैं आप जो हम जैसे तिरस्कार व बहिष्कार करे गये लोगों के बारे में कुछ भला सोचते हैं । आपने कहा है कि आप मेरे ऊपर कहानी लिखना चाहते हैं तो मेरे लिये यह बुरा मानने की नहीं बल्कि अपने भाग्य को सराहने की बात है । लेकिन घूम फिर कर दुर्दैव है कि वहीं ले आता है , आपको मेरा मोबाइल नंबर चाहिये । आपसे एक बात निवेदन करना चाहती हूं कि जैसा कि मैंने अपने पिछले पोस्ट्स में लिखा है कि दुनिया बस स्त्री-पुरूष में विभाजित है इसमें हमारा स्थान तो है ही नहीं ,हम तो बस एक बोझ की तरह हैं । आप जानते हैं कि मोबाइल के लिये फोटो आई.डी. अनिवार्य होता है और उसके लिये मैं पैनकार्ड , ड्राइविंग लायसेन्स या पासपोर्ट जैसी चीज कहां से लेकर आऊं ? हमें तो सरकार को राशन कार्ड देने में भी हिचकिचाती है यानि सरकार मानती है कि हमें भोजन तक की आवश्यकता नहीं है । इसलिये आपसे प्रार्थना है कि अगर कोई विशेष बात न हो कि मोबाइल नंबर अत्यावश्यक हो तो आप मेरे गुरूदेव , मार्गदर्शक , भाई और पिता समान डा.रूपेश श्रीवास्तव का नंबर ले लीजिये (09224496555) उनके मोबाइल से जैसा आप चाहेंगे तो मुझे संदेश भी मिल जाएगा और यदि आप चाहें तो बात कर सकते हैं पर समय निर्धारित करने के बाद ही । बातें कुछ ज्यादा ही भारी हो गयी हैं इस लिये जरा सा मज़ाक करने की इजाजत दीजिये ; अगर आप में साहस है तो एक (लैंगिक विकलांग) हिजड़े के लिये हिजड़ा आईडेन्टिटी बता कर मोबाइल खरीद कर गिफ़्ट कर दीजिये । मेरी इस बात का तनिक भी बुरा मत मानियेगा क्योंकि यही वह जगह है जहां मैं अनदेखे मित्रों से सचमुच मजाक करके हंस लेती हूं वरना तो जिन्दगी में इतना अधूरापन है कि बताने को शब्द ही नहीं हैं । एक बार फिर से मेरी ओर ध्यान देने के लिये आपका और उस अनदेखे ईश्वर का धन्यवाद । मुझे आपके उत्तर की प्रतीक्षा रहेगी ........
नमस्ते

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आयुषवेद by डॉ.रूपेश श्रीवास्तव